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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

कहानी पुरानी आवर्त की जुबानी




पहली पहली मुलाकात
ज्यादा नहीं होती बात
फिर धीमे धीमे पकडती बातें रफ़्तार
जुड़ने लगते है दिल के तार
कुछ कहते है इसे दोस्ती और कुछ प्यार
जीवन अधूरा  लगता उसे उसके बिना
दूभर लगता  जीना
एक रोता है हमेसा आंसू हसी के
दूसरा जीता लाइफ हसी से
कविताए बनती नित नयी
उमड़ते शब्दों में भाव कई
एक उनमे प्यार खोजता है
दूसरा उसमे दोस्ती को पूजता है
कब कैसे ख़त्म होगी ये कहानी
आगे फिर कभी सुनियेगा 'आवर्त' की जुबानी......:)
क्रमश;



आज फिर दिखे वो दो दिल घूमते कही
एक तो हमेसा की तरह मस्त दूसरा सोचता गलत सही
एक ढूँढता बहाने बात करने के
दूसरा बात करता ख़तम बहाने से
एक गाता "प्यार हमे किस मोड़ पे ले आया"
दूसरा गुनगुनाता "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे "
ये कॉमिक tragedy यु हे चलती रहेगी
आगे की खबर आपको 'आवर्त' से मिलती रहेगी :)क्रमश:.. 

एक की मासूम सूरत याद आई
चेहरे पे मुस्कान शरमाई
वो दिल करता हमेसा उसकी बात
और 2ra दिल उड़ाता मजाक दिन रात
एक चाहे एक पल में भी सदियो का साथ
दूसरा बिता दे सदिया बबात
कब तक एक सहता रहेगा चुप चुप के
और मुस्कुराएगा दुसरे की नजर से
'आवर्त' को पता चले तो वो भी शेयर करे सबसे .....:)
क्रमश:.....

वो दो बेखबर दिल
रहते बेसब्र नहीं पाते  मिल
एक समझे इसे बेकरारी
दूजे को लगती है ये दूरियां भी प्यारी
बोझ जो दिल पे है हटता नहीं
बात अजीब सी हो गयी है
दोस्ती प्रेम के आगोश में सो गयी है
एक अंतर्द्वंद है मस्तिस्क में
की कारण कौन किसका है
दोस्ती से उत्तपन है प्यार
या उसका हिस्सा है
एक को बड़ी बैचैनी है
दिल में हलचल din 2ni 4ni है
वो चाहता है अपने दिल की
पर क्या 2ra दिल समझ पायेगा
या हमेसा की तरह बात को हवा में उडाएगा
इस कहानी के twist n ant 'आवर्त' आपको xternal के बाद बताएगा ………………….
क्रमश:....:)


Xtrnal के बाद है कहानी कुछ इस प्रकार . . . .

एक दिल तो है कहने को बेकरार ..
पर क्या 2ra है तैयार ..
डरते डरते पहले ने किया इज़हार ..
2ra दिल न चौका न ही हुआ फरार . .
वो तो निकला philosphr. .
वही पुराणी पट्टी पढ़ाने लगा . .
मजाक में दिए उसने सारे मुद्दे भगा . .
जवाब मांगने लगा जब पहला दिल . .
हिसाब माँगा जब वो मरता था तिल तिल ..
तब जाकर दूसरा कुछ पिघला . .
और smthing serious उगला . .
कहने लगा रिश्ते और भाव की दुविधा  है केवल ..
दोस्ती है रिश्ता n प्यार है भाव available. .
1la दिल तो है ही अँधा प्यार में ..
मिलाने लगा हाँ उसकी हाँ में ..
जवाब जो मिल चूका था उसे चुपके से न में ..
पर आज वो सबसे ज्यादा खुश था ..
क्युकी हल्का हुआ था उसके दिलका एक बोझ ..
खतम हो गयी थी उसकी खोज ..
वो जाते जाते ये कह गया ..
बस तुम्हे भी हो प्यार किसी से ..
और वो अपना ले तम्हे ख़ुशी से ..
न हो कोई बहाना,  न दोस्ती का समर्पण ..
हो बस प्यार का अंत में संगम ..
ये शब्द प्यार के 2re के दिल में प्यार जगा गया ..
Bt अब 'आवर्त' क्या  समझाये 2no को ..
एक कहानी यहाँ हुई खत्म ..
क्या पता 2ri शुरू हो ..
................इस तरीके से एक कहानी का क़त्ल हुआ ....:(
Reactions:

2 comments:

megha suri ने कहा…

"kahani" kismat ki.."aavart" ki zubani

अमित रावत ने कहा…

Just INSPIRED n built it around

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