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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

"वो" from drafts

एक धीमी धीमी मुस्कान ने घेर लिया मेरे होठो को
वो उस मुस्कान को हँसी में बदलना चाहता
बात करके उस से चैन मिला इतना
पर वो उस चैन को सुकून में बदलना चाहता
हर बात में ख़ुशी जो झलकती थी
वो हर ख़ुशी को बात में बदलना चाहता
मुझे कम लग रही थी यादें 
वो हर याद को याद करना चाहता
हर किसी को उसका साथ लेकर चलना
न है जो साथ उनके लिए भी फिक्र करता
जुड़े रहने की कोशिश में अपने हर रिश्ते  से
जो बनाया कभी अगर  भूले भटके  से भी
मेरा एक जन्म कम लगता है  मुझे
पर वो इस एक जन्म में जन्मो की हसरत पूरी करना चाहता
मेरा तो दायरा सीमित है
पर वो असीमित अनंत को दायरों में बाँधना चाहता
यादें मेरी धूमिल हो जाती एक पल में
वो हर पल को संजोना चाहता
मेरी मुस्कान चंद लम्हों की
वो हर लम्हे को मुस्कुराना चाहता
मेरा खुद के नियमो को तोडना हमेशा
वो नियमो के लिए खुद टूटना चाहता
पर शायद ही समझ पाया कोई आजतक
के वो क्या है समझाना चाहता ....................."मेरे दोस्त"

 
 
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