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सोमवार, 5 दिसंबर 2011

:

अब  बातें  नहीं  होती . . . . . सन्नाटा  सा  है . .
गहरा. . .
शायद  बात  करने  को  कुछ  बचा  नहीं . . . .
या  फिर  बातो  से अब  कुछ  होता  नहीं. .
एक  विराम   सा  है . .
"अमित" . . . असीम . . . .
खाली  होता  हूँ  तो  तुमको  सोचता  हूँ. . . . .
और  जब  तुमको  सोचु  तो  खाली  सा  हो  जाता  हूँ . . . . . .
"शून्य" के  करीब  एक  मोहपाश  पाता हूँ . . . . . .
(:




Reactions:

4 comments:

sushma 'आहुति' ने कहा…

चंद पंक्तिया और बेहतरीन अभिव्यक्ति.....

अमित रावत ने कहा…

Sukria aur Abhaar sushma ji..:)

Bimal Raturi ने कहा…

mst hai... accha likha hai

amit rawat ने कहा…

:))

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