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दोस्त

  Being "Alone"
Sum find it less to cheer,
Sum see it as a fear.
A way to depression 4 few,
Is LONELINESS dat hard to chew. .!

Sum times no 1 around,
Only listeng d airy sound.
So much to speak bt no1 to share,
A part of life 1 likes to spare.

Every smile hv a miss of joy,
Happiness appears as a stolen toy.
"getg bored" nly left to express,
Findg life difficult to access.

Is dis d way it is to b seen,
or is der smthg else it mean.
Yes! It could b done in a betr way,
Lonliness hav so much to say.

Alone is d Lotus in a mess,
Yet so beautiful, smooth n fresh.
Alone is d moon single is the sun,
Nothg required to make them run.

Sitg alone in a dark night,
Yet wid billion of stars shwg d light,
Or walkg alone on a road,
Yet so much surrounds to acmpany ur mood.

Its just d way to check ur morality,
Or say a reflection of ur persnality.
Crawlg to b wid smone al d tym,
Or shwcasg urself in a perfect rhym.

Lonliness is 1 of d best thing to stick,
As a wondrful tym 4 ownship to click.
So much to b done in life,
So cut d sadness wid a jovelin knife.

Here finally to realiz u can nevr b alon,
As long as u r truely with ur own.
With d blessgs of eldrs by ur side,
God as an ur faithful guide.
  By-Ak@nksha....




 ये किसी दोस्त की तलाश है और में शुक्रगुजार हूँ  की इसे में अपने ब्लॉग पर  लिख रहा हूँ...:)  


मेरी  तलाश :
आंख  खुली  तो  "माँ " की  तलाश  थी,
पैरों  पे  खड़े   होके चलना  चाहा  तो  एक  मजबूत   मगर   प्यार  भरे   सहारे   की  तलाश  थी,
कुछ  बड़ी   हुई   तो  गुड़ियों   की  तलाश  थी ,
कुछ  दुनिया   समझी   तो  दोस्तों   की  तलाश  थी,
सबने   समझाया   यहाँ  अपना  कोई  नहीं   होता,
जश्न   में  सब होते   हैं  ,दुःख   में  कोई  नहीं   रोता,
हर  कोई  यहाँ   अकेला   आया  है ,
बस   जो   एक  तेरा  अपना  है   वो   ही   तेरा   साया   है ,
अब   मुझे  अपने  उस   साये   की  तलाश  थी .....
हर   इन्सान   ने   मुझे  अपना  बताया,
अपना  बताकर  मुझपे  प्यार  जताया,
पर  शायद  कुछ  कमी  थी ,
मेरी  आँखों  में  अभी   भी  नमी  थी ,
अभी  भी  कुछ  तो  अन-कही  बात  थी ,
शायद  अभी  भी  मुझे  अपनेपन  की  तलाश  थी .....
पलकें  बिछाकर  बैठी  रही ,
सपनो  के  भव्य  भवन  निर्मित  हो  रहे  थे ,
में  पुलकित ,आनंदित ,उन्मत्त  हो  रही   थी ,
पर  जब  कोई  न   आया ,मैंने  अपनी  ज़िन्दगी  के  पन्नो  को  पलटाया,
कोई  पन्ना  फटा  हुआ  तो  कोई  अधुरा  पाया, तब  समझ  आया .....
किसी  और    की  नहीं,मुझे   तो  अपनी  ही  तलाश  थी  ..... 


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अभिषेक  जोशी  के  लिए 

 
दूर  खो  गयी  कहीं  जीने  की  चाह  थी
सूख  गयी  पल  भर  में  वो  पत्ते  की  डाल  थी
आज  भी  वो  परिंदा  उड़ने   से  डरता   है
सबको  हसाता  है  पर  खुद  रोता  है

मांगी  थी  सबकी  ख़ुशी   किसी   ने
न  पता   था  खुद  बह जायेगा  पत्ते  की  तरह 
इक  बार  फिर  कुचला  जायेगा  फूलों   की  तरह

हिम्मत  देख  उसकी   वो  तेरा  खुदा   भी  हैरान  है
प्यार  को  प्यार   से  पुकारती
मिटने  की  चाह  है

कुछ  न  उसके   पास   है
न  कहीं   कुछ  आस  है 



खुद  हँसता   है  तेरे  मुख  की  ये  मुस्कान  देखकर
रो  पड़ता   है  अपनी   खोयी   हुई  पहचान   देखकर 

he he he :)




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