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गुरुवार, 23 सितंबर 2010

काली सड़क

अंत  में  मैं  अकेला  था  उस  काली  सड़क  पर ,
एक  साया  था  मेरे  साथ ,
मेरा  ही  था  वो  शायद,
पर  वो  भी  खो  गया ,
ज्यो  ज्यो  रात  काली  बढती  गयी
अब  तो  सिर्फ  यादें , बातें , वादें  ही  थे
जिनके  सहारे  बढ  रहा  था  मैं  उस  घनघोर  रात  में ,
सन्नाटे  का  शोर  गूंज  रहा  था,
चीत्कार  मेरे  मन  की,
 दूर  दूर  तक  कोई  नहीं  सुन  रहा  था ,
तभी  ख्याल  आया  और  पथिको  का ,
कहा  है  वो  सब  जो  चले  थे  मेरे  साथ
और जिनके  कदम  उठे  थे  मेरे  बाद
साथ  लेकर  चलना  चाहता  था  मैं  उनको,












पर  कुछ  ज्यादा तेज  निकले ,
तो  किसी  ने  इनकार  किया  बढने   से
फिर  भी  कुछ  तो  थे  जो  बढे जा  रहे  थे  मेरे  साथ
बिना  किसी  संशय, एक  उम्मीद  पे
की  मंजिल  हम  सबकी  एक  ही  है ,
पर  उस  काली  सड़क  पर  कुछ  चोराहे  भी  थे
हर  बार  में  अपने  दल  को  एक  चौथाई   पाता
मेरे  कदम  कह रहे  थे  उनसे  भी  अब  चला  नहीं  जाता
अब  फिर  मै  अकेला  था  उस  काली  सड़क  पर
अपने  साये  से  भी  जुदा  होकर  चल  रहा  था ,
में  इसी  सोच  मै  डूबा  चल  रहा  था
की  कुछ  दिखे  अपने  मुझे  जो  निकले  थे  आगे
कहने  लगे  के  मेरे  लिए  बढे  थे  वो  आगे  मुझे  छोडकर
ताकि  बाद  मे  उस  काली  सड़क  पर  मुझे  न  हो  परेशानी
फिर  मैंने  जो  रह  गए  थे  पीछे  उनका  इन्तजार  करने  की  ठानी
मंजिल  करीब  आ  रही  थी  फिर  से  हम  साथ  थे
भूल  गए  थे  किसने  क्यों  छोड़ा  किसी  को
क्यों  नहीं  पूछा  एक  क्षण   हमको
हम  वापिस  सब  साथ  थे

मना   रहे  थे  खुशी  मंजिल  को  पाने  की
अब  वो  रात  भी  जा  चुकी  थी
सूरज  अंगड़ाई  ले  रहा  था 
मेरा  साया  भी  अब  मेरे  साथ  था
कहते  हुए  की  रात  मे  भी
मैं  था  वही,  पर  मैं  दख  न  पाया  उसे
सोच  बदली  नयी  सुबह  के   साथ  मेरी
मैंने  छोड़  दी  थी  चिंता  अब  उस  काली  सड़क  पे  अकेले  चलने  की
विस्वास  था  मेरे  मन   मे  अब
कभी  भी  कही  भी  किसी  भी  सड़क  पर  मैं  अकेला  नहीं
हैं  वो  यादें  बातें  वादे  मेरे  अपनों  के
जो  हर   पल  देंगे  साथ  मेरा
चल  पड़ा  हु  फिर  मैं  अब  किसी  डगर  पर
लेकिन  इस  बार  सड़क  का  रंग  मायने  नहीं  रखता मेरे  लिए  __________


Apar!m!t_________mann_________khushi__aseem_____

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 http://vivaciousappy.blogspot.com/2010/07/end-of-d-road.html

कॉलेज में मुस्कान

याद आएँगे कॉलेज   के  दिन  
जब  होंगे  हम  दोस्तों  के  बिन 
मौज  मस्ती  के  वो  सारे  पल 
जो  हमने  बिताये  थे  साथ  ही  कल 
Classs में  घूमना  teacher  को  घुमाना 
एक  दूसरे  को  सताना  nd मुस्काना 
याद  आएगी  मुझे  upadhyay की  फाडू  मिमिक्री 
Bineet की  attendance और  exam की  normal बेफिक्री 
Martin के  logic nd स्टाइल 
Taneja के  चिकने  चेहरे  की  shyness
Akhilesh का  मुस्काना 
Sorry या  कहू  हमेसा  दांत  दिखा  के  ठहाके  लगाना 
Apoorva के  xcuse,nd फोटो  प्रेम

जोशी  जी  से  मिश्रा   जी  का  c.o में  गेम
और  जोशी  जी  का  दोस्तों  के  लिए  प्रेम 
Pankaj rawat nd akki रावत के  mind  गेम 
Pradeep giri और  kundan की  जोड़ी 
Chaudhry,ayodhya,bharti की  secnd सीट  की  तिकड़ी 
तिकड़ी  की  बात  आई  है  तो 
तिकड़ी  तो  है  panky,nirmal,johar की 
उसमे  panky की  लम्बाई ,nirmal के  ऊपर  जोके  और  johar की  चतुराई 
याद  दिलाएगी  हर  बार  दोस्तों  की  हरकते 
याद  आएगी  मुझे 
Megha  की   sweet innocent  n  “ loud”  voice
Neetu की  choice
Nidhi nd poonam का  चेहरा  जिसका  हमेसा  सुस्ताना 
Prema का  बार  बार  दोस्त  बुलाना 
Neha का  कहकहे  लगाना 
Garhkoti का  front seat पे  जाकर  बतियाना 
Deepika के  ultimate statemaent

Anju का  किसी  से  भी  भिड  जाना 
बाद  में  बताना 
थोडा  थोडा  teacher  और  हमको  पकाना 
याद  आएगा  मुझे 
Piyush का  dance
Ghnsala का  नृत्य ,कविता 
एक  gangola जो  हमेसा  नींद   में  हे  जीता
बाकी  समय  counter strike का  brand embassoder hota
Rohit का  pc knowledge n movies देना 
Shukla का  इस  बारे  हर  समय  कोई  बहाना  बनाना 
Premsankar का  लेट  आना 
Abhisek Chandra का  बेंच  के  नीचे  phon पर  बतियाना 
ये  सब  याद  आएगा  मुझे 
और  याद   आएगा 
Sagar का  talking style
Topper   kandpaal का  बात बात मुस्कुराना
मुझे  हमेसा  उसका  चिड़ाना 
Prbaht raturi जी  का  silence
Deepak pathak का  innocence
Srivastv ki double mean बातें 
आप   उसकी  बात  सुनते  तो  शरमा   जाते 
Maathur की  “Golden”  creativity
याद   आएगा  मुझे 
Paper ball paper plane 
खतरनाक  से  उनके  name
याद  आएगा  मुझे  टिफिन  का  लंच  से  पहले  खुलना 
Back benchers यानी  हमारा 
कभी  कभी  पड़ी  को  अनचाहा   मूड  बनाना 
एक  दूसरे  को  चिडाना 
सबका  मिलके  किसी  एक  की  watt लगाना 
Muvies के  लिए  भटकता  क्लास  में 
याद  आएगा  मुझे 
मेरी  pd ka गुमना 
याद  आएगा  cbnst में  techer का  चिल्लाना 
हर  बार  हर  tcher का  martin-martin पुकारना 
मार्टिन  का  बारी  बारी  snooker खिलाना 
याद  आएगी  कैंटीन 
याद  आएगा  womens का  volley ball court
उसमे  खेलना ,मस्ती  करना 
Akki का  camrA हमेसा  उससे  फोटो  खीचना 
और  याद  आएगा  क्लास  के  बाहर 
Akanksha का  चौकाना 
कभी    fresher पे  डांस  तो  कभी  क्लास  me top aana
Shalini की  बातें 
Kiran की  energy
Shruti की  smile
Shika का  अपना  एक  अलग  स्टाइल 
क्या  मुझे  भी  याद   करेगा  कोई 
For माय  उलझी  हुई  बात 
Priyanka ,raashi  n mamta का  मिलना
Versha aur priyanka का  रहना  साथ 
Prthiba n pranjali mam की  हर  एक  बात 
Vipin का  संवाद 
बालासुन्दरी  का  मन्दिर , वह  हमारा  पहुचना  पैदल 
Photos ही  click करना  हरपल
बस  के  बाहर  eee gang
Dev भाई  का  गुस्सा 
कुछ  Seniors जिन्होन  हमारा  खून  चूसा 
Kuch juniors जिनपे  है  मुझे  भरोसा 
 Ashwin का  ज्ञान  भण्डार 
यह  है  मेरे  clg का  छोटा  संसार 
कहने  लिखने  को  बहुत  कुछ 
में  याद  करूँगा  यह  सब  सचमुच 
यद्  आएगा  बहुत  कुछ  इतना  की  लिख  न  पाउँगा 
शायद  ही   किसी  को   समझा  पाउँगा     
जो  है  मेरे  हाथो  में  वो  में  लिख  पाया  हु 
यह  न  समझना  जिनका  नाम  नहीं   इसमें  उनको  में  भूल  गया  हु 
दोस्त  की  दोस्ती  और  प्यार 
से  बना  इतना  बड़ा  संसार 
मेरी   कलम  नहीं  बाँध  सकती  उसे 
वो  ,है  मेरे  दिल  में  बसे 
याद  आएगा  मुझे  सब 
एक  एक  पल  
आंसू  ले  आएगा  मेरी   आँखों  में  कल !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सोमवार, 13 सितंबर 2010

प्रयासित

द्वार  अपने  आप  खुलेगा
हमेसा  सोचते  रहे  यही
खटखटा  कर  जबकि  निकल  चुके  थे  कई
भावना  के  साथ  प्रयास  भी  था  जरुरी
क्यों  इंतज़ार  किया  तुमने  युही
माना  के  प्रेम  सत्य  था  तुम्हारा
परन्तु  व्यक्त  करने  पर  ही   मिलता  है  सहारा
क्यों  करते  हो  अपेक्षा  इस  स्वार्थी  दुनिया  से
के  कोई   पढने  को  आएगा  तुम्हारे  नेत्रों  की  सचाई  को
माना  तुम  हक़दार  थे  उस  पुरस्कार  के
परन्तु  दावा  तो  पेश  करना  था
थोडा  सा  दिखावा  ही  तो  करना  था
रह  गए  पीछे  सोच  के  हमेसा
के  भाव  तुम्हारे  सचे   और  कर्म  है  अच्छे
पर  इस  दुनिया  को  दिखाना   पड़ता  है 
जो  है  तुम्हारे  पास  सीखाना  पड़ता  है
जब  कोई  दोस्त  मुझसे   पूछे
क्या  हम  युही  दोस्त  रहेंगे  सच्चे
मैंने  कहा  बिलकुल  अगर  हम  रहे  इंसान  इतने  ही  अच्छे
जीवन  में  बदलाव  आएगा
पर  हर  रिश्ता  ये  ‘आवर्त ’ निभाएगा
अब  तो  जो  है  दिखाना   सीखो
हदों  में  रहकर 
हमेसा  हे  चुप  मत  रहना  गम  सहकर
एक  बार  द्वार  खुलेगा  अपने  आप
परन्तु  खटखटाना   तो  सीखो
इस  दुनिया  में  रहने  का  यही  है  तरीका
जिसने  न  किया  इंतज़ार  ,हर  प्रयास  है  उसका  विजेता  सरीखा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
………………..KHUSh!........dOST!...........am!t
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