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बुधवार, 1 दिसंबर 2010

पहेली

ये कविता एक एकतरफा प्रेमी की diary से ली गयी है.....plz dont laugh














प्यार  वो  पहेली   है   जिसे बूझता   है  हर कोई
पर  समझ   न  किसी  के  आती  है
बड़ी  नटखट  है   उसकी  सहेली  भी
पर  याद तो सिर्फ  उसकी  ही   आती  है 
जाने  क्या क्या बहाने बना  के  हमको  बहलाती  है
सोचती हमारा ध्यान उनसे  भटक  जाएगा
पर  याद  तो  बाद में उसकी  उन्ही बहनों  के कारन आती है
अलविदा  कह  के  जब  वो  चली  जाती  है
अगली  सुबह  मिलने  के  लिए  हमारी  रात  कट  नहीं  पाती  है
तब हम  खो  जाते  है  उसके  ख्यालो ,बहानो  में
सच  में  8 घंटे  की  मस्त  नींद  कही  नहीं   जाती  है
पहले  कहती  है  तारीफ़  करो
और  जब  हम  शुरु  हो  जाते  है  तो  शरमा  जाती  है 
हमे  किसी  और  के  साथ  बात  करता देख  ले
तो  उस  समय बड़ा  मुस्काती  है
बाद  में  न  जाने  क्यूँ  रूठकर  हमसे  दूर  बैठ  जाती  है
मनाना  हमे  आता  नहीं
दूर  उनको  देखा  जाता  नहीं
इसलिए  अंत  में  खुद  ही  मान  जाती  है
गीत  प्रेम  के  गा  गा  कर  बड़ा  जलती  है
कशमकस   में  फंसा  के  हमको  तडपाती  है
कितनी  बार इज़हार  किया  हमने  प्यार  का
पर  हर  बार  घुमा  फिरा  के  जवाब  दे  जाती  है
यु  तो  सुना दू  दोस्तों  तुम्हे  इस  पहेली  के  सभी  हिस्से
कहानी  और  किस्से
पर  अब  मुझे  पता  है
ये  बकवास  पड़ने  में  आपको  बड़ी  बोरियत  आती  है
प्यार  वो  पहेली  है  जिसे  बूझता  है   हर  कोई
पर  समझ  न  किसी  के आती  है ………..क्रमश ...

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

काली सड़क

अंत  में  मैं  अकेला  था  उस  काली  सड़क  पर ,
एक  साया  था  मेरे  साथ ,
मेरा  ही  था  वो  शायद,
पर  वो  भी  खो  गया ,
ज्यो  ज्यो  रात  काली  बढती  गयी
अब  तो  सिर्फ  यादें , बातें , वादें  ही  थे
जिनके  सहारे  बढ  रहा  था  मैं  उस  घनघोर  रात  में ,
सन्नाटे  का  शोर  गूंज  रहा  था,
चीत्कार  मेरे  मन  की,
 दूर  दूर  तक  कोई  नहीं  सुन  रहा  था ,
तभी  ख्याल  आया  और  पथिको  का ,
कहा  है  वो  सब  जो  चले  थे  मेरे  साथ
और जिनके  कदम  उठे  थे  मेरे  बाद
साथ  लेकर  चलना  चाहता  था  मैं  उनको,












पर  कुछ  ज्यादा तेज  निकले ,
तो  किसी  ने  इनकार  किया  बढने   से
फिर  भी  कुछ  तो  थे  जो  बढे जा  रहे  थे  मेरे  साथ
बिना  किसी  संशय, एक  उम्मीद  पे
की  मंजिल  हम  सबकी  एक  ही  है ,
पर  उस  काली  सड़क  पर  कुछ  चोराहे  भी  थे
हर  बार  में  अपने  दल  को  एक  चौथाई   पाता
मेरे  कदम  कह रहे  थे  उनसे  भी  अब  चला  नहीं  जाता
अब  फिर  मै  अकेला  था  उस  काली  सड़क  पर
अपने  साये  से  भी  जुदा  होकर  चल  रहा  था ,
में  इसी  सोच  मै  डूबा  चल  रहा  था
की  कुछ  दिखे  अपने  मुझे  जो  निकले  थे  आगे
कहने  लगे  के  मेरे  लिए  बढे  थे  वो  आगे  मुझे  छोडकर
ताकि  बाद  मे  उस  काली  सड़क  पर  मुझे  न  हो  परेशानी
फिर  मैंने  जो  रह  गए  थे  पीछे  उनका  इन्तजार  करने  की  ठानी
मंजिल  करीब  आ  रही  थी  फिर  से  हम  साथ  थे
भूल  गए  थे  किसने  क्यों  छोड़ा  किसी  को
क्यों  नहीं  पूछा  एक  क्षण   हमको
हम  वापिस  सब  साथ  थे

मना   रहे  थे  खुशी  मंजिल  को  पाने  की
अब  वो  रात  भी  जा  चुकी  थी
सूरज  अंगड़ाई  ले  रहा  था 
मेरा  साया  भी  अब  मेरे  साथ  था
कहते  हुए  की  रात  मे  भी
मैं  था  वही,  पर  मैं  दख  न  पाया  उसे
सोच  बदली  नयी  सुबह  के   साथ  मेरी
मैंने  छोड़  दी  थी  चिंता  अब  उस  काली  सड़क  पे  अकेले  चलने  की
विस्वास  था  मेरे  मन   मे  अब
कभी  भी  कही  भी  किसी  भी  सड़क  पर  मैं  अकेला  नहीं
हैं  वो  यादें  बातें  वादे  मेरे  अपनों  के
जो  हर   पल  देंगे  साथ  मेरा
चल  पड़ा  हु  फिर  मैं  अब  किसी  डगर  पर
लेकिन  इस  बार  सड़क  का  रंग  मायने  नहीं  रखता मेरे  लिए  __________


Apar!m!t_________mann_________khushi__aseem_____

check it on  appy's blog in English

 http://vivaciousappy.blogspot.com/2010/07/end-of-d-road.html

कॉलेज में मुस्कान

याद आएँगे कॉलेज   के  दिन  
जब  होंगे  हम  दोस्तों  के  बिन 
मौज  मस्ती  के  वो  सारे  पल 
जो  हमने  बिताये  थे  साथ  ही  कल 
Classs में  घूमना  teacher  को  घुमाना 
एक  दूसरे  को  सताना  nd मुस्काना 
याद  आएगी  मुझे  upadhyay की  फाडू  मिमिक्री 
Bineet की  attendance और  exam की  normal बेफिक्री 
Martin के  logic nd स्टाइल 
Taneja के  चिकने  चेहरे  की  shyness
Akhilesh का  मुस्काना 
Sorry या  कहू  हमेसा  दांत  दिखा  के  ठहाके  लगाना 
Apoorva के  xcuse,nd फोटो  प्रेम

जोशी  जी  से  मिश्रा   जी  का  c.o में  गेम
और  जोशी  जी  का  दोस्तों  के  लिए  प्रेम 
Pankaj rawat nd akki रावत के  mind  गेम 
Pradeep giri और  kundan की  जोड़ी 
Chaudhry,ayodhya,bharti की  secnd सीट  की  तिकड़ी 
तिकड़ी  की  बात  आई  है  तो 
तिकड़ी  तो  है  panky,nirmal,johar की 
उसमे  panky की  लम्बाई ,nirmal के  ऊपर  जोके  और  johar की  चतुराई 
याद  दिलाएगी  हर  बार  दोस्तों  की  हरकते 
याद  आएगी  मुझे 
Megha  की   sweet innocent  n  “ loud”  voice
Neetu की  choice
Nidhi nd poonam का  चेहरा  जिसका  हमेसा  सुस्ताना 
Prema का  बार  बार  दोस्त  बुलाना 
Neha का  कहकहे  लगाना 
Garhkoti का  front seat पे  जाकर  बतियाना 
Deepika के  ultimate statemaent

Anju का  किसी  से  भी  भिड  जाना 
बाद  में  बताना 
थोडा  थोडा  teacher  और  हमको  पकाना 
याद  आएगा  मुझे 
Piyush का  dance
Ghnsala का  नृत्य ,कविता 
एक  gangola जो  हमेसा  नींद   में  हे  जीता
बाकी  समय  counter strike का  brand embassoder hota
Rohit का  pc knowledge n movies देना 
Shukla का  इस  बारे  हर  समय  कोई  बहाना  बनाना 
Premsankar का  लेट  आना 
Abhisek Chandra का  बेंच  के  नीचे  phon पर  बतियाना 
ये  सब  याद  आएगा  मुझे 
और  याद   आएगा 
Sagar का  talking style
Topper   kandpaal का  बात बात मुस्कुराना
मुझे  हमेसा  उसका  चिड़ाना 
Prbaht raturi जी  का  silence
Deepak pathak का  innocence
Srivastv ki double mean बातें 
आप   उसकी  बात  सुनते  तो  शरमा   जाते 
Maathur की  “Golden”  creativity
याद   आएगा  मुझे 
Paper ball paper plane 
खतरनाक  से  उनके  name
याद  आएगा  मुझे  टिफिन  का  लंच  से  पहले  खुलना 
Back benchers यानी  हमारा 
कभी  कभी  पड़ी  को  अनचाहा   मूड  बनाना 
एक  दूसरे  को  चिडाना 
सबका  मिलके  किसी  एक  की  watt लगाना 
Muvies के  लिए  भटकता  क्लास  में 
याद  आएगा  मुझे 
मेरी  pd ka गुमना 
याद  आएगा  cbnst में  techer का  चिल्लाना 
हर  बार  हर  tcher का  martin-martin पुकारना 
मार्टिन  का  बारी  बारी  snooker खिलाना 
याद  आएगी  कैंटीन 
याद  आएगा  womens का  volley ball court
उसमे  खेलना ,मस्ती  करना 
Akki का  camrA हमेसा  उससे  फोटो  खीचना 
और  याद  आएगा  क्लास  के  बाहर 
Akanksha का  चौकाना 
कभी    fresher पे  डांस  तो  कभी  क्लास  me top aana
Shalini की  बातें 
Kiran की  energy
Shruti की  smile
Shika का  अपना  एक  अलग  स्टाइल 
क्या  मुझे  भी  याद   करेगा  कोई 
For माय  उलझी  हुई  बात 
Priyanka ,raashi  n mamta का  मिलना
Versha aur priyanka का  रहना  साथ 
Prthiba n pranjali mam की  हर  एक  बात 
Vipin का  संवाद 
बालासुन्दरी  का  मन्दिर , वह  हमारा  पहुचना  पैदल 
Photos ही  click करना  हरपल
बस  के  बाहर  eee gang
Dev भाई  का  गुस्सा 
कुछ  Seniors जिन्होन  हमारा  खून  चूसा 
Kuch juniors जिनपे  है  मुझे  भरोसा 
 Ashwin का  ज्ञान  भण्डार 
यह  है  मेरे  clg का  छोटा  संसार 
कहने  लिखने  को  बहुत  कुछ 
में  याद  करूँगा  यह  सब  सचमुच 
यद्  आएगा  बहुत  कुछ  इतना  की  लिख  न  पाउँगा 
शायद  ही   किसी  को   समझा  पाउँगा     
जो  है  मेरे  हाथो  में  वो  में  लिख  पाया  हु 
यह  न  समझना  जिनका  नाम  नहीं   इसमें  उनको  में  भूल  गया  हु 
दोस्त  की  दोस्ती  और  प्यार 
से  बना  इतना  बड़ा  संसार 
मेरी   कलम  नहीं  बाँध  सकती  उसे 
वो  ,है  मेरे  दिल  में  बसे 
याद  आएगा  मुझे  सब 
एक  एक  पल  
आंसू  ले  आएगा  मेरी   आँखों  में  कल !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सोमवार, 13 सितंबर 2010

प्रयासित

द्वार  अपने  आप  खुलेगा
हमेसा  सोचते  रहे  यही
खटखटा  कर  जबकि  निकल  चुके  थे  कई
भावना  के  साथ  प्रयास  भी  था  जरुरी
क्यों  इंतज़ार  किया  तुमने  युही
माना  के  प्रेम  सत्य  था  तुम्हारा
परन्तु  व्यक्त  करने  पर  ही   मिलता  है  सहारा
क्यों  करते  हो  अपेक्षा  इस  स्वार्थी  दुनिया  से
के  कोई   पढने  को  आएगा  तुम्हारे  नेत्रों  की  सचाई  को
माना  तुम  हक़दार  थे  उस  पुरस्कार  के
परन्तु  दावा  तो  पेश  करना  था
थोडा  सा  दिखावा  ही  तो  करना  था
रह  गए  पीछे  सोच  के  हमेसा
के  भाव  तुम्हारे  सचे   और  कर्म  है  अच्छे
पर  इस  दुनिया  को  दिखाना   पड़ता  है 
जो  है  तुम्हारे  पास  सीखाना  पड़ता  है
जब  कोई  दोस्त  मुझसे   पूछे
क्या  हम  युही  दोस्त  रहेंगे  सच्चे
मैंने  कहा  बिलकुल  अगर  हम  रहे  इंसान  इतने  ही  अच्छे
जीवन  में  बदलाव  आएगा
पर  हर  रिश्ता  ये  ‘आवर्त ’ निभाएगा
अब  तो  जो  है  दिखाना   सीखो
हदों  में  रहकर 
हमेसा  हे  चुप  मत  रहना  गम  सहकर
एक  बार  द्वार  खुलेगा  अपने  आप
परन्तु  खटखटाना   तो  सीखो
इस  दुनिया  में  रहने  का  यही  है  तरीका
जिसने  न  किया  इंतज़ार  ,हर  प्रयास  है  उसका  विजेता  सरीखा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
………………..KHUSh!........dOST!...........am!t

सोमवार, 23 अगस्त 2010

बादल हूँ


भीगा भीगा बादल हूँ,
बरसने कि जद में ,
आवारा आवारा फिरता हूँ ,
खोजता हूँ सूखी जमीन ,
जी चाहता है बरस जाऊ,
सूखी है जमीं उसकी प्यास बुझाऊ,
भीगा भीगा बादल हूँ.....
बरसू जो एक पल में अस्तित्व मेरा खो जाए
पर सदियो से सूखी जमीं तो तृप्त हो जाए
भीगा भीगा बादल हूँ ,
बरसने की जद में...............
:) 

शनिवार, 3 जुलाई 2010

मन-ख़ुशी


मेरा  मन  मुझसे  नाराज  क्यूँ 
ख़ुशी  पूछती  है 
ख़ुशी  पूछती  है 
दिल  में  जज्बात  है, नहीं  जताते  क्यूँ 
ख़ुशी  पूछती  है 
चाहते  हो  हर दम   ही   गम  क्यों 
ख़ुशी  पूछती  है 

अकेला  रहना  भाता  है  क्यूँ 
ख़ुशी  पूछती  है 
रोने  में  ही   मिलता  है  सुकून  क्यूँ 
ख़ुशी  पूछती  है 
मन  कहे  चाहू  तुझे  हर दम 
इसलिए  भाते  सिर्फ  गम 
नाराज  न  में  हु  तुजसे 
बस  देखना  चाहू  कितना  प्रेम  करती  तू  मुझसे 
दिल  में  जज्बात  जताने  के  लिए  नहीं 
हमेशा  रहे  प्रेम  बस  यही   सही 
रोने  में  सुकून  मिटा  है  या  नहीं 
में  हँसु  और  हो  न  ख़ुशी ,है  क्या  ये  सही 
दुःख , दर्द , अकेलापन ,आंसू ,नाराजगी  यही  तो  मिला 
फिर  भी   चाहते  हो  मुझे   क्यूँ 
खुशी  पूछती  है !!!!!

चाहत  सिर्फ  तेरी  है 
मिले  संग  चाहे  कुछ  भी 
मकसद  तो  है  केवल  पानी  है  ख़ुशी 

मन  हमेशा  कहे 
ये  सब  था 
सिर्फ  ख़ुशी  के  लिए  ख़ुशी  के  लिए !!!!!!!


ख़ुशी दोस्ती अमित ...................

मंगलवार, 22 जून 2010

मुरझाया गुलाब

7:45 AM
आज सुबह  जब  विक्रम*  में  चढ़ा  तो देखा   बैग  कि  सबसे  आगे  की  जालीदार  जेब  में  एक  गुलाब का मुरझाया  फूल  पड़ा  हुआ  था!

तो  उसे  देखकर  मुझे  थोडी  सी  कल  की  बातें  याद  आई  "वैलेंटाइन्स दिवस"  कि बात है,वो  फूल  अपूर्व  ने  मुझे  बस  की  सीट  के  नीचे  से  उठाकर  दिया  था,ये  कहते  हुए  की  "ये  कोई  तरीका  है  तुम  फूल  तोड़  के  कहीं  भी  फ़ेंक   दो जब  किसी  ने  कुछ  दिया  है  तो  कद्र  करो"

फिर वो फूल मैंने रख लिया था ।
फिर  उसके  बाद  मैं   वापिस अपने  ख्यालो में खोया हुआ  विक्रम  में  था।
उस  फूल  को  देख  रहा  था और  मेरे  हाथ मेरे  फ़ोन  पर  चल  रहे  थे।



एक  फूल  पड़ा  हुआ  था  मेरे  बैग  की  जेब  में
मुरझाया,अशक्त,ग़मगीन
देख  कर  उसको  मैंने  पूछ  लिया
तुम्हारी  भी  क्या  ज़िन्दगी  है
कितने  हाथो  से  गुजरकर  आखिर  खो  जाओगे
जीना  सिर्फ  दो  क्षण  का  तुम्हारा
अब  कहा  पाओगे
अचानक  एक  आवाज़
खिली  हुई,जानदार,उत्साहित गूंज उठी
मेरे  अन्तर्मन  में

“मुझे  मुरझाना  पसंद  है
मुझे  टूट  जाना  पसंद  है
मुझे  सबके दिल को भाना पसंद  है”

मैं  चौंका, देखा  इधर-उधर
ये  आवाज़  किधर  से  आई  है
वो  गुलाब  जो  मुरझाया  था  बोला
इधर  देखो भाई  मैंने  आवाज़  लगाई  है
तुम  कौन  सा  जीकर  भी  पूरी  अपनी  जिंदगी
किसी  को  सुख   दे  पाते  हो
हमेशा  ही  तो  जो  चाहते  है तुम्हें
उन्हें  ही दुखाते  हो
पर  मुझे  जो  चाहता  है
रहता  है  हमेशा  प्रसन्न
क्या  हुआ  जो  जिंदगी  है  मेरी केवल  दो  क्षण
ये  दो  क्षण  ही  मेरे  है  सार्थक,करते तृप्त मन

जिसने  सीचा
जिसने  थोड़ा
जिसने  सजाया
जिसने  बिखेरा
जिसने  कुचला

सभी  ही  तो  मेरी  दो  पल  की
कहानी  के  गवाह  है।

ना  वो  हैं दुखी  मेरे  कारण
वरना  जीना  मेरा  निरर्थक  है
उसके  सूखे  लबो  से  इतनी  कोमल
ध्वनि  में  इतनी  बड़ी  सीख  की  अपेक्षा  न  थी
पर  वो  यही  नहीं  थमा

मेरे  प्रश्न  को  वो  गंभीरता  से  ले  बैठा
पूछा  था  जो  प्रश्न  मैंने  उसे
वो  मुझसे  ही  पूछ  बैठा
मैं  निरुत्तर था  फिर  भी  हार  नहीं  मानी
सुना  दी  उसको अपनी  स्वार्थी  कहानी
की हम  तो  ख़ुशी  के  हकदार  बनते  है
पर  तुम  तो  निस्वार्थ  बुनते  हो  ख़ुशी के  पल
ना  है  तुम्हें  चिंता  क्या  होगा  कल
हर  कोई  तुझे  उठाता-पटकता  खुश  होता  है
और  तू  हमारी  ख़ुशी  में  खुद  को  खोता  है
मेरी  पुरानी  आदत
जो  न  देती  है  जरा  भी  माहौल  समझने  की  इज़ाज़त
मै  बोलता  जा रहा  था
राज  दिल  के  खोलता  जा  रहा  था
देखा  एक  पल   उस  गुलाब  को
वो  सन्नाटे  में  कही  खो  चुका था
खुशबू  विलीन  वातावरण  में  मृत  वो  हो  चुका  था
अब  भी  उसकी  पंखुडिया  मुझे  उसकी  यात्रा  की  याद  दिला  रही  थी
मेरे  अपनों  के  बीच  उसके  विचरण  की  लघुकथा  सुना  रही  थी
मेरा  अंतिम  सलाम  था  उसके  सुर्ख  शारीर  को  सहेजना
उसको  तो  हमेशा  ख़ुशी  ही  बाँटनी  थी
निष्प्राण  होकर  भी  कर  रहा  अपने  जीवन  को  सार्थक  वो
ख़ुशी  बाँटते,महसूस करते  सो  चुका  था  जो …

8:15 AM
विक्रम  से   उतरा  थोड़ी  देर  खड़ा  रहा  मेरी  कॉलेज  बस  आ  गयी  थी  में  उसमे  चढ़ा और  आम दिनों की तरह कॉलेज  की  ओर निकल पड़ा ………..

विक्रम* : देहरादून की  स्थानीय सवारी और जगहों पर इसे टमटम या जुगाड़ नाम से भी जाना जाता है।  

शुक्रवार, 18 जून 2010

पहली ख़ुशी

-->

दोस्तों , ये मेरी पहली कुछ पंक्तिया हैं जो कि मैंने अपने back paper से पहले लिखी थी और उसके
बाद से में कुछ न कुछ विचित्र, अजीब और पकाऊ लिखता गया !!!!!!!!!!!!!!!






so plz check my first few lines........




जहाँ तक दिखी सड़क
वह तक चलता गया मैं
चलता ही गया मैं
चोराहे मिले बहुत
पर बिना सोचे समझे
चलता गया मैं
चलता ही गया मैं
कभी बहकावे में तो कभी होश में
दिन के उजाल़े और रात के आगोश में
चलता गया में
बस चलता ही गया में
कुछ पल के लिए ठहरा में
भटका कुछ हसीं चेहरों के पीछे
बैचैन हुआ किसी कि नजरों पर
पर जैसे ही दिखी सड़क
चलता गया में
बस चलता ही गया में
गमों को झेलता हुआ
ख़ुशियो को उडेलता हुआ
थका न मैं
अपने आप को सम्हलता गया मैं
जहा तक दिखी सड़क
वह तक चलता गया मैं
बस चलता गया मैं
अभी भी चल रहा हूँ
स्थिर हूँ या नहीं
कल भी चलता रहूँगा
चाहे रहूँ या नहीं...............
:)

सोमवार, 14 जून 2010

bla bla...........kisi ki chupi baatein

      
All ma lyf dere hav been incidents wich hav made me feel guilty ,some actions hav disturbed me…..some questions unanswered!!!!some topics undiscussed…..at every point of lyf I hav faced myself as an ill characterfrom ,whom I hav alwayz tried to run away…..i hav been successful in hiding dis inner demon from my near n dear ones…..but now it seems to b uncontrollable….im unable to hide it anymore……it has started to overshadow my conscience….its becoming difficult for me to keep it chained wid ma inner

Strength….i need frenz to help me out…..recently in tryin to b a gud frend dis inner atrocious demon overcame my senses n disgraced me…..some frenz hav now become aware of my vicious character….n I am no longer able to hold such dreadful flaw in me………I want everyone to my real identity……d real voluptous me…….i don’t people to take me as a humble character….because I am not….i wont be able to take anymore blames n I don’t want to be d reason of my frend's suffering anymore……..i'l neva b able to forget watt I did wid ppl…who trusted me n shared der thots n secrets wid me….maybe I'l neva b able to win d war dat I hav fot wid ma inner demon since a long tym……I want dat ppl should b aware of inner demon n nt misjudge ma character ……..i am not a gud human being,n I want ppl to know dat…d guilt is unbearable for me……I hav alwayz tried to b god human but every tym I hav failed….maybe I shud try not talkin to ppl n create a distance wid everyone…..atleast den many ppl will nt b hurt….i hav been in d company of many who hav encouraged n strenghthened my hidden demon….i hav misjudged ppl to b a help……whom I shud hav avoided….became my idol….dey did dere best to demoralise me……thanx to dem…..i hav bcm a dreadful character who is a harm to d society…. I hav becom smthing I alwayz feared to be……I know no one can help me…..wenever um alone dese thots roam in ma mind…..dats a reason y I don’t like being alone……but now it seems dat loneliness may be a cure to dis disease…….i don’t want to be lonely but den I cant see ma frenz being hurt n still dey try not to blame me for dat……may be dis is wat lyf has for me in mind…I have loved ma frenz n in lovin dem I hav most of d tyms done things wich r wrong…….n the most troubling fact is dat I know dat I hav done so many wrongs In lyf till date……..n many I'l do in d coming years…..its something dats hurting…………...

it's not me
it' appy

विश्वास


उलझने  ज्यादा  राहते  कम  है 
उम्मीदें  ज्यादा  चाहतें   कम  है 
फिर  मिली  एक  रौशनी 
अब  उजाल़े  ज्यादा  अँधेरा  कम  है 
जिंदगी  ज्यादा  डर  मौत  का  कम  है 
ख़ुशी  ज्यादा  दर्द  दुःख  का  कम  है 
मंजिल  साफ़  है  भटकाव  कम  है 
पास  गया  उस  रौशनी  के  तो  पता  चला 
वो  खुद  में  बहुत  कम  है 
उसमे  भी  द्वेस  जादा  प्रेम  कम  है 
अन्धकार  ज्यादा   रौशनी  कम  है 
सवाल  ज्यादा  जवाब  कम  है 
दुविधा  ज्यादा  विकल्प  कम  है 
वो  रौशनी  जो  प्रकाशित  थी  मेरे  मन  में  बुझ  रही  थी 
लेकिन  पहले  मुझसे  आकर  पास  वो  मेरे  बोली 
मैं  प्रकाशित  तुजसे  थी 
“तेरी  आशा 
तेरी  प्रेरणा 
तेरा  उत्साह 
तेरा  विश्वास“
मुझे  हर  पल  दे  रहा  उर्जा   था  
क्यूंकि   इस  दुनिया  में  बुराई  बहुत  ज्यादा   और  अच्छाई बहुत  कम  है 
अब  न  रौशनी  को  न  मुझे  कोइ  गम  है 
उसमे  है  जो  अच्छाई  भले  ही   वो  कम  है 
मैं  भी   हूँ   उत्साहित   मेरा  मन   अब  सम  है 
वो  प्रकशित  रहे  हमेशा  उज़ाला फैलाये  चाहे  उसमे   रौशनी  कम  है !!!!

दोस्ती

सहजता की सीमा है  दोस्ती

बेशर्मी  की  हद   है  दोस्ती 
एक  दूसरे  के  अस्तित्व  को  खोजना  है  दोस्ती 
गुस्सा  लड़ाई  हँसना  हँसाना  है  दोस्ती 
जीवन  से  जादा  जीती  है  दोस्ती 
किसी  का  कन्धा  किसी  का  सर  है  दोस्ती 
खुशी  में  आंसू  और  गम  में  हँसी  है  दोस्ती  
रात  में  रौशनी  है  दोस्ती 
धूप  में  shower  है  दोस्ती 
प्यार  का  tower है  दोस्ती 
ना  जाने   क्या-क्या  है  दोस्ती 
अगर  एक  दोस्त  न  हो  तो   फिर  क्या  है  दोस्ती 
केवल  एक  भावहीन  शब्द  है  दोस्ती 

Thanks to all my “दोस्त” for making “दोस्ती” wrd special for me

शनिवार, 8 मई 2010

college frns

बुधवार, 14 अप्रैल 2010

pta ni kyun

8/02/2010



Kya hota h jb bewajah koi mil jata h,

Kehte h log hmse k hme pyar ho jata h,

Bahar ki duniya sahi chalti h,lekin dil ka haal bigad jaata h

Hr rasta na jaane kyun unki ore mud jata h,

Hr koi apne aap ko he kyun tanha paata h,

Soch soch k apne chehre ko kyun murjhata h,

Pucho toh keta h,

Bahar ki duniya sahi chalti h,lekin dil ka haal bigad jaata h,

Automata me gaane sunta h,

Java me thoda sa padta h,

Dbms me dosto k saath bunk maarta h,

Co ki class me gaane suntan h,

Aage kya batau tumhe ptas h

Free lecture me dosto se batiyata aur khelta h,

Lekin jb baat kro toh kehta h

Dil kbi kbi ajeeb ho jaata h

Na jeene ko jee chahta h,marne se b darr lagta h

Bahar ki duniya sahi chalti h,lekin dil ka haal bigad jaata h



Khush!Dost!Am!t....:)

wo bhi dukhi tha


आज जब देखा उसे बेंच पर टिकाए सर
थोड़ा सा घूमा मेरा दिमाग इधर उधर
फिर पूछ बैठा मैं किसी से क्या हुआ है इसे
कभी भी दुखी देखा था जिसे
आज क्यु वो गमगीन है
मुझे तो लगता था शायद यही है वो
दुनिया जिसकी हर पल हसीन है
और तो और वो यही नहीं थमा
अचानक जब दिखी उसकी एक झलक
सन्न सा था मैं
सकते है आंसू उसकी आँखो से भी छलक
क्यू था वो आज इतना उदास खोया खोया
उठने के बाद भी बेंच से थोड़ा सोया सोया
पूछ्ते रहे सभी
कुछ तो बताए कारण
पर मैं ही था जिसे पता चला कुछ
आँसू इसके भी सकते है सचमुच
धोखा देना आसान है दुनिया को
बजाय इसके कि दो तुम खुद को
अब वो उठ चुका था
मोती जो पिघला था अब वो सूख चुका था
फिर चढने लगी रंगीनियत उसके मिजाज में
आने लगी वही पुरानी शरारत उस्के अन्दाज में
चहक कर फिर से सताने लगा पूर्ववत सबको
छुप गये थे सारे आँसू अब जो
दिखाने लगा फिर से अपनी झूठी खुशी
पर आज का ये एहसास मुझे कुछ सिखा गया
जाने अन्जाने वो सब कुछ दिखा गया
कि खुश रहना शायद सबकी मजबूरी है
पर रोना हर पल ना सही कहीं कहीं जरूरी है।
खुशीदोस्तीअमित्……………………………


बुधवार, 3 मार्च 2010

khaali dimaag shaitaan ka ghar!!!!!

at the midnight,what do u think two frnds cn talk about
drowsy in sleep........sharing thoughts
widout any intentions.... as alwayz ....it started with ..max..  .......

max:
   i often think what da future will be. ma dreams will come true or i'll b afraid
  of dreamin ever again.
  i see ppl doing stuffs knowing that they are in between of nowhere
  i know i m headstrong enough to take in anyone but
  i sumtimes freakout thinkin what the future will be............

   now this gives me confidence dat guys like u also afraid wid time
  thn why should i worry about ma future livin in a beautiful present
  worth more then thinking abot a worst future...............

max:
     most powerful thing that i have discoverd so far is time
     and i am still finding a way to rule it before it ruins me...........

amy:
    its a famous sayin-
    if  u lag or lead the time
    u'll be ruined, don't think about ruling
    just walk with it
    and it will b with u......................
amy:
     every second time was giving me a chance to walk in
     but i was foolish every next second i was loosing it
     and going far
     or staying without time
     now out of time.........................  
max:
    some say i am the best
    some say i am talented
    i am always trying to find misleads in me
    my dreams are real big
    i just wanna move ahead move move forward
   but where did this road end through the woods,
   in the lake through the path ,in the break
   i wanna be 'ME'  when i wake up after 30yrs not somebody............
 
next mornig amy read consciously all d msgs frm max
and appreciated
bt as always max says
kuch b bol do kuch b likh do
"khaali dimag shaitaan ka ghar"

so friends 
wait for next one>>>>>>>>>>>>
....kHuSh! DoSt! Am!T....


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