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सोमवार, 23 अगस्त 2010

बादल हूँ


भीगा भीगा बादल हूँ,
बरसने कि जद में ,
आवारा आवारा फिरता हूँ ,
खोजता हूँ सूखी जमीन ,
जी चाहता है बरस जाऊ,
सूखी है जमीं उसकी प्यास बुझाऊ,
भीगा भीगा बादल हूँ.....
बरसू जो एक पल में अस्तित्व मेरा खो जाए
पर सदियो से सूखी जमीं तो तृप्त हो जाए
भीगा भीगा बादल हूँ ,
बरसने की जद में...............
:) 
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