KHOJ

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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

डर और जश्न



मैंने कभी सपने नहीं देखे

क्यूंकि मुझे उनके टूटने का डर था

न ही बनाये रिश्ते अपने नए

क्यूंकि अपनों के छूटने का डर था

न ही दौड़ा मज़िल की ओर

भाग कर गिर जाने का डर था

न की कभी कोशिश से भी कोशिश

नाकामयाबी का डर था

जिंदगी जी सिर्फ यु ही

खुलकर जीने में मुझे बदनामी का डर था .

पैदल ही मेरा सफ़र था .

फिर आये तुम

दौड़ा दिया ,

दिखाए सपने .

चौंका दिया ,

बनाने लगा में रिश्ते ,

कोशिश किया उठकर जीने लगा.

नाकामयाबी और बदनामी को नकार दिया .

सपने टूटे फिर भी

उनके होने का मुझे जश्न था ,

रिश्ते भी छूटे पर

उनकी मीठी यादो का जश्न था ,

गिरा मैं चलकर भी

दौड़ने में थक कर चूर हो जाने का जश्न था,

कोशिशे की लगातार हजार कुछ हुई कामयाब


पर मुझे उनके होने का जश्न था,

जिंदगी जी ख़ुशी से गुमनामी का डर नहीं

मुझे जीने का जश्न था

पैदल है  अभी भी सफ़र मेरा

पर तुम जैसा दोस्त बनाने का जश्न था जश्न है जश्न रहेगा.


KHUSH!DOST!AM!T :)

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

तन्हाई और तू



मेरी तन्हाई मुझे भाती थी

बातें चलती थी

और वो सिर्फ सुनती जाती थी

एक दिन फिर तुम आई

खिलखिला के टूटी तन्हाई

धीरे से साथ छोड़ा उसने

अकेले में साथ दिया था जिसने

अब तुम थी

और बातें चलती मैं सुनता जाता था

पल बीते कुछ और मेरी आदत जाती रही बोलने की

पर इस पल छूटा तेरा साथ इस कदर

तब टूटा मेरा सब्र . .जाने के बाद तेरे

अब न है कोई दरम्या तन्हाई और मेरे

अब दोनों एक दूजे को सुनने की कोशिश करते है . . . .:):)

रविवार, 24 अप्रैल 2011

वार्तालाप muskaan aur aavrt


aavart:
Wo swatah sehej ubharti muskaan. .
Kisi masum chehre ki jaan. . .Kaha hai?
Wo sote chehro pe upajti kuch lakiren. .Haar kr baith jate the jb. . 
to pal bhr dkh kr aa jaati ti wo sehej smarpit muskaan. .
Dhumil si dur lgti h wo niswarth saras muskaan. . .
Apurn sa akaarn ye nirdosh jahan. . .
Khojta h wai purani muskaan. . . .
Mann me khushi ki pehchaan. . .Wo muskaan wo muskaan. . . . .Aur bs muskaan

muskaan :
Logo k chehro m khusiya jhalkane vali,
nirasha m aash jagane vali,
nav chetna jagane vali,
Kya Apna rasta bhul gyi vo sundr sehez muskaan,
ya duniya ki buriyo se dr kr kahi chup gyi vo muskaan,
ya fr dukh k andhero m kho gyi vo muskaan..
Rahi bn kr dhund ri hu m vo pyari muskaan,
kahin kisi kinare kbhi mil jae toh pas le aana vo muskaan..

aavart :
Ye subah ki baat ti. . . .
abi kuch pal pehle Mujhe mili ek nahi hasi. . .
Dost mila purana,uske chehre pe thi basi. . .
Ab muskaan ko b sochta hu mjbur kru. . .
Jindagi k katu styo se na dur kru. .
Ek urja prem aur dosti ki usme bharu. . .
Wo muskaan bhtakna chhor d. . .
Mere chehre pe aa jaye. . .
Koi na chede use bs wo mann ko bha jaye. . . . .
Kisse fir se purane lvly suna d. . . .Aur jindagi haseen khushi se muskura d.

muskaan :
Kya vo urja muskaan ko vapas la paegi,
dukh aur drd ki aandhi dur kr paegi..
Kya muskaan pyar k usi paalne m jhul payegi,
kya vo chehro pe raunak la payegi..
Bhul chuki h muskaan apna ghr,
kya vo usay paalane vale k pas vapas aa payegi..


aavart :
Muskaan ka kaam h khusiya baatna . . . .
Kya kyu ka sawal nahi h bhari. . . .
Ye to bs h bhvisya ki tyaari. . .
Jb b usne aane ki thaani h. . .
Mere chehre pe likhi ek nayi kahani h. . . .
Kahani ki suruwat aur ant sukad hote h. . .
Aur muskaan k aane se phle gum thode hote h. . .
Wo sb kuch kregi. .
Palne wale se lekar jhelne wale tk ko amulya karj me bhregi. . .
Khilegi jrur wo fir se . . .
Kya kyu ki gunjais betuki reh jaegi. . .Bs khushi muskaan ko aur muskaan khushi ko paegi. . . .
:):)
kHUSh!doSt!Am!t
 


शनिवार, 23 अप्रैल 2011

mnjoor Nahi

धोखा  है  मंजूर 
सच्चाई   का  आइना   नहीं
ये  दुनिया  हंसती   बेवजह
आंसू  असल  के  भी   रोना   नहीं
मंजूर  है  बैचनी   का  महल
सुकून  का  कोना  नहीं
अपने  संग   होता  हमेशा  गलत
२रो  के  साथ  हमेशा  सही
परेशानी  अपनी  सबसे  बड़ी
किसी  की  मौत   का  भी  गम  नहीं
किसी  की  ख़ुशी  है  मंजूर
अपने  गम  में  भी  आँखें  नाम   नहीं
होता  प्रेम  बेवजह  कही
तो  चाहकर  भी  तन्हाई  है  कही .
ये  तो  चंद   पंक्तिया है .
पता   नहीं  क्या  है  "मंजूर "
जो  होना  "नहीं " चाहिए .
और  क्या  है  नहीं
जो  मंजूर  होना  चाहिए ?

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

lyrics ki koshish

छत  पर  थे  मिलते 
खुशियों  से  बातें  थे  बुनते 
यादें  सुनहरी आती  है  आज .
दोस्तों  का  ख्याल  है  बस   दिल  में .......
करता  हूँ  याद ....
यादें  सुनहरी  आती  है  आज .
हवा  चलती  थी .......धुन  कोई  मचलती  थी .....
सुनता  हूँ   साज ..........
यादें  .....यादें  सुनहरी  आती  है  आज
गहराई  है  कितनी   बातों  में  उनकी  ..
यादें  bnke  सवेरा  जो  आती  है  रोज ...
खो  जाता  हूँ  ....उस  मस्ती  के  दौर  में ...
मिलते  थे  हम
छोड़  सारे   काम  काज  .
यादें  सुनहरी .......
सिमटी  हुई  गहरी .....यादें  सुनहरी  आती  है  आज .
वो  छत  भी  है  सूनी   आज ........
बातें  है  बस  ...और  उनका  ख्याल ....
हवा  चलती  है ..पर  न  कोई  धुन  मचलती  है  आज .....
बस  यादें ... यादें   सुनहरी  आती  है  आज  ....:)

रविवार, 10 अप्रैल 2011

मंजिले यहाँ रास्ते यहाँ

मंजिले यहाँ
रास्ते यहाँ
किसकी है फिक्र
ढूँढते तुम उनको हो कहाँ
ये चाहतें ही तो रखती है तुमको तो जवाँ
मंजिले यहाँ
रस्ते यहाँ
ले ले साथ उसे जो मिले जहा
चलते चल जो नप सके ये जहाँ.........
मंजिले यहाँ रास्ते यहाँ .....:)

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

LET ME KNOW WHAT U THINK..:)


सोमवार, 4 अप्रैल 2011

lyf in college!!

sittin in d class i think
who says dat tym passes in a blink....
crowded by talentful ton
i feel a wasted one...
bt den lyf is wat we dont see
something from wich v cant b free...
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