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मंगलवार, 11 जनवरी 2011

बरसात from drafts


अँधेरी  रात  में , 
चमकती बिजली  और बरसात  में 
महसूस   करता  मै  अपने  रोम  छिद्रों  मे नमी  को 
एक  चाते  और  फ़ोन  के  सहारे  घर  की  ओर 
Full on मौसम  नो  बोर 
अंधड़  और  मेरी  जदोजहद  मे  छाता  उड़ता  कभी  सम्हालता 
खुसबू  गीली  मिटटी  की  सूंघता 
अँधेरे  मे  न  जाने  कदम  कहा  कहा  टिकता 
चला  जा रहा  घर  की  राह   पे 
अपने  आप  से  हे  हांकते  गप्पे 
जिनमे  खलल  पड़ता  पत्तो  के  शोर  और  बदल  के  गर्जन  का 
भीग  चुका  मे  आधा  पूरा 
अचानक  उपरवाला  flash मार  के  रास्ता  दिखाता 
काश  इस  छाते और  फ़ोन  के  अलावा  भी  कोई  मेरे  साथ  होता 
छाता उड़ा,मुड़ा मैंने  उसे  बंद  किया 
संकल्प  बारिश  मे  हवा  को  झेलते  हुए  घर  जाने  का  लिया …
और चलते चलते ये पंक्तिया लिखते …
जाने मे कहा खो गया 
वक़्त और मौसम बहुत जल्दी बीत गया ..
Finally in home भीगते  भागते  ठण्ड  से  कपकपाते ..
 ………………..22/0ct/2010………..sham ko 6:30 se 7:00 pm k बीच ..


The Adventures of Sherlock Holmes 
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