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रविवार, 23 जनवरी 2011

"meet wid frenz" from draft

एक पल मिला और हम हसे खूब हसे ..
चेहरे लाल ,पसीना टपकता रहा माथे से मुह तक ..
पर हम ख़ुशी में तरबतर सिर्फ और सिर्फ यादो से ..
यु तो यादें हमेशा रुलाती है पर यादो का मूर्त रूप हँसा गया …
हम उछले कूदे मस्त ,बेफिक्र बिन लिहाज बडबडाते रहे ..
क्यूँ ..?...क्यूंकि दोस्त मेरे साथ थे जिनकी याद आँखें गीली कर जाती थी ….
पर जब आज मिले तो हँसी ख़ुशी से आँखें गीली और मन बह गया ….
बस  आनंद का असीम भाव ख़ुशी के साथ मन में रह गया …..
विचारो की स्वतंत्रता और शब्दों पे न कोई पाबन्दी, पूर्ण सुरक्षा का भाव …
दिल और दिमाग से सारे फितूर गुल, न कोई मरहम न कोई घाव ,,,
बंदिशे हटी यादें छटी मन की अनचाही मुराद मिली …
सोचा काश ये पल और लम्बे होते या कहू कभी ख़त्म न होते …
पर ये पल अपने आप में सम्पूर्णता का एहसास दे गये ….
यु तो स्कूल में बचपन से गया ..
पर ये कुछ ख़ास था एक दोस्त ही नहीं मेरा सहपाठी भी मेरे साथ था …..
नहीं बता सकता तू गाली दे या बकवास, कोस मुझे जी भर के ..
पर तेरे से मिलना ये सब सुनना अनमोल सा है ……..
हाँ अनमोल भी सायद छोटा सब्द है बस ये है एक एहसास …एक कहानी …..कभी न ख़त्म होने वाली …
मिलते रहना दोस्तों ये दोस्त इंतज़ार करेगा …….हमेशा हमेशा …..और हमेशा ……..
Khush!dost!am!t………….:)


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