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शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

ये रिश्ते अनोखे

"ये  रिश्ते  अनोखे"
पास रहकर न समझा कभी
दूर जो जाना पड़ा,
याद आई है अभी
कुछ तो बात थी ,
जो तकरार में भी मुस्कुरा लेता था,
अब सिर्फ चंद बातो के मोहताज है
कहने को  ही  मुलाकाते   होंगी अब,
बता न सके कभी दिल के इतने राज है
खुश हूँ दिल से ये भी बात है
मंजिल के करीब है सभी
चरम पर जज्बात है
पर वो रास्ते का सफ़र ही भाया है
ये मंजिले हासिल करना तो सिर्फ मोह माया है !!

"सूखे तालाब के कीचड़ में तड़पती मछली सा
और सागर किनारे गीली रेत का
किस्सा भी कुछ अजीब है
एक को इंतज़ार है बादलो से बारिश का
तो दूसरे को सूझनी धूप की तरकीब है " 

एक साथ दोनों की इच्छा पूरी नहीं हो पायेगी
सूरज जाएगा धूप छोडकर
तो ही बरखा रानी आ पाएगी
जीएगी मछली भी तालाब की
और कुछ वक़्त में रेत भी सूख जाएगी !!
वादे तो खूब कर लिए
पता है निभाने की कोशिश होगी हमेशा
लेकिन उनके पूरे होने की शुभ घडी
न जाने कब आएगी .........
अनजाने,अनचाहे यादों से सींच ये रिश्ते दोस्ती और प्यार के मैं बना गया
अब बस एक एहसास है हर पल मेरे पास है "ये  रिश्ते  अनोखे  "



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1 comments:

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावों से नाजुक शब्‍द......बेजोड़ भावाभियक्ति....

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