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सोमवार, 26 सितंबर 2011

आवर्तिकाए

मेरी और आवर्त की कुछ बातें
जिनमे न छंद है
न ही लय न ताल है
बस जिन्दगी से जुड़े कुछ सवाल है
इन्ही बातो को मैंने नाम दिया है आवर्तिकाए 


>>यूं  न कर परिहास किसी के स्वप्न  का .."आवर्त"
     कुछ  ख्वाइशे  तेरी  भी  अधूरी  है ...........

>>एक ही बात पर बार-बार रोना अच्छा नहीं लगता......."आवर्त"
     तेरी आदत बदल दे एक ही जगह अटकने की ......................

>>"क्यूँ "............................"आवर्त "
     परिस्थितियाँ इंसान  को  इंसान  नहीं  रहने  देती...

>>"आवर्त"...जीना  कुछ  इस  कदर  जिंदगी  की ......
     ज़िन्दगी भी  खुश-कहे तुझसे इसने मुझे जिया  है ...

>>चलते-गिरते-सम्भलते........"आवर्त".....
    ज़िन्दगी  की  दौड़  तो  पूरी  करनी  ही   है .......

>>कोशिश  करता  चल .........."आवर्त"
    ज्यादा  सवाल  न  किया  कर  ज़िन्दगी  से ......

>>ये  शोर  यूँ  ही  नहीं  सुने  देता ..."आवर्त"
    कुछ बात  है  तेरे  सन्नाटे में  भी ...

>>वक़्त  के  आगे  हर  कोई  मजबूर  है ...."आवर्त "
    ये  दौर परेशानियों का  तेरे  साथ   ही  नहीं  चलता....

>>प्रेम-पथ पर चलने से न घबरा ...."आवर्त"
    तेरा हर एक बढता कदम लोगो की उम्मीदें जगाता है .....

>>प्रेम में पड़ने वाला, प्रेम नहीं पढता है .........."आवर्त"..........
     प्रेम को पढने वाला उसमे पड़ने की कोशिश करता है....

>>एक  और  शाम  गुजर  गयी ...."आवर्त"
    आज  फिर  तू  तारे   गिनकर  सो  जाएगा .........

>>तेरा  लिखना  मुझे  मजाक  लगता  है ....."आवर्त"
    जब वो हँसकर  कहती  है  "मुझे  समझ  नहीं  आया"....

>>आज  फिर  तम्मनाओ  के  सागर में  गोता लगाया ......"आवर्त"
     कुछ  मोती  चाहतो  के  और  ढूँढ  लाया ...........

>>ये  दूरियां  ही  तो  हैं  जो  जोड़े  रखती  है ...."आवर्त"
     नजदीकियों   में  कहाँ  आजकल   वो  मिठास  पनपती   है .......
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