KHOJ

Loading

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

मुझे अच्छा लगता है

तेरा ये रोकना 
बार बार मुझे टोकना
अच्छा लगता है

ना करते करते मान जाना
प्यार से मुझे समझाना
गुस्से में कभी कभी चुप हो जाना
मुझे अच्छा लगता है

तू सोचती है कि 
मैं क्यों इतना परेशान होता हूँ
रातो में देर तक जागकर क्यों सोता हूँ
और फिर बाद में आकर तुझे ये सब क्यों बोलता हूँ

"क्यूँकि "


जब तुम मेरा ध्यान रखती हो
बार  बार मेरा हाल सुनती हो
करती रहती हो कोशिशे मुझे खुश करने की
कुछ भी बातें बुनती हो
मुझे अच्छा लगता है

लेकिन कभी जब तुम गुमशुम होती हो
बेकार की बातों में दिल खोती हो
मेरा मजाक मुझे चुभ जाता है
कभी कभी तुम्हे मेरी वजह से रोना भी आता है
तब मैं भी दुखी हो जाता हूँ
बातें इधर उधर की बनाता हूँ
ताकि चेहरे पर तुम्हारे हंसी आ जाए
उदासी तेरी मुस्कान में खो जाए
फिर जब तुम खुश होती हो
हल्का सा गुस्सा दिखा कर नाराजगी में कहती हो
"तुम बुरे हो "
तो मुझे अच्छा लगता है..........

तेरी प्यारी आवाज़ में मेरे अजीबो गरीब नाम
तेरा डाँट खा कर भी करने उल्टे-सीधे काम
मुझे आकर सब कुछ बताना
दिल के जज्बात तेरे सिर्फ मुझे जताना
मुझे अच्छा लगता है.....

और भी है बहुत कुछ
कहा अनकहा
तेरे साथ महसूस किया
बहुत कुछ बाकी है
अभी बस थोड़ा सा बता दिया
मेरे साथ रहना हमेशा यु ही
क्यूंकि मैं कुछ भी कहु
"मुझे तू अच्छी लगती है" …… क्रमश;






Reactions:

2 comments:

Yogita Kulkarni ने कहा…

Bohot hi achchi hai... Bhagwaan kare ye saath yuhi bana rahe...

Ashw!n $emwal ने कहा…

h kon ye habibi...

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

comments

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes |