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रविवार, 12 जून 2011

सोच  तुझे  देख  कर  ही  मेरी  ख़ुशी
देख  तुझे  सोच  कर  ही  मेरी  हँसी.

जिंदगी  मेरी  जिन्दा  हुई  तुझसे  कहीं
कहीं  तुझ  में  ही   मेरी  जिंदगी  बसी .

पल  पल  जब  शाम  होती  जाये
रौशनी सूरज  की  मेरी  आँखों  से  छिप जाये
बस  एक  तेरी  याद  का  सहारा 
मेरी  आँखों  से  पल  पल  गिरता  जाए.
चमकते  मोती  बिखर  कर  आँखों  से
मेरी  तन्हाइयों को  रोशन  कर  जाए .

बस  तू  न  छिपना  कभी 
रहना  बनकर  मेरे  जेहन  एक  छाव  सी 
सोच  तुझे  देख  कर  ही  मेरी  ख़ुशी
देख  तुझे  सोच  कर  ही  मेरी  हँसी.



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